चंद्रपूर सिटीपीएस उडते हुए सवालों के घेरे में लेकिन हकीकत क्या

✒️संजय तिवारी चंद्रपूर (Chandrapur प्रतिनिधी)

चंद्रपूर(दि .25 जानेवारी) :- 

चंद्रपुर महाऔष्णिक विद्युत केंद्र (CSTPS) के मुख्य अभियंता विजय राठौड़ एवं उनके तकनीकी सहायक विकी राठोड पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अब दूसरा पक्ष भी सामने आने लगा है। जहाँ एक ओर राजनीतिक शिकायत के माध्यम से आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर CSTPS के भीतर तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि ये आरोप तथ्यहीन, समय-चयनित तथा ठोस प्रमाणों के अभाव में लगाए गए प्रतीत होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य अभियंता विजय राठौड़ के कार्यकाल में चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन ने अपने लगभग 40 वर्षों के इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। पूर्व में जहाँ संयंत्र 1500–1600 मेगावाट उत्पादन तक सीमित था, वहीं हाल के महीनों में यह क्षमता बढ़कर लगभग 2760 मेगावाट तक पहुँच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि तकनीकी दक्षता, बेहतर मेंटेनेंस प्लानिंग और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है।

इतना ही नहीं, CSTPS पर वर्षों से चले आ रहे आर्थिक बोझ को भी काफी हद तक कम करने में सफलता मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में विद्युत केंद्र का लगभग ₹800 करोड़ का घाटा कम किया गया है, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस दौरान कोल मैनेजमेंट, मेंटेनेंस सिस्टम, टरबाइन एफिशिएंसी और रिसोर्स प्लानिंग में कई संरचनात्मक सुधार किए गए।

मुख्य अभियंता विजय राठौड़ को जानने वाले अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में नियमों और प्रक्रियाओं के अंतर्गत ही निर्णय लिए और किसी भी प्रकार के अनावश्यक दबाव को स्वीकार नहीं किया। जानकारों के अनुसार, यही कारण है कि उनके कड़े फैसलों से कुछ असंतुष्ट एवं स्वार्थी तत्व अब उन्हें निशाना बना रहे हैं।

समय-चयन और आरोपों की प्रकृति पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में यह तथ्य भी सामने आया है कि जिन आरोपों की चर्चा अब सोशल मीडिया एवं कुछ न्यूज़ पोर्टलों पर हो रही है, वे कथित रूप से दिसंबर माह में लगाए गए थे, लेकिन उन्हें जनवरी में अचानक सोशल मीडिया व पोर्टल पर सार्वजनिक किया गया। सूत्रों का कहना है कि शिकायत के साथ किसी भी प्रकार के दस्तावेजी प्रमाण या ठोस तथ्य संलग्न नहीं किए गए हैं, बल्कि केवल एक पत्र के माध्यम से आरोप लगाए गए हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मुख्य अभियंता विजय राठौड़ आगामी फरवरी 2026 में सेवा-निवृत्त होने वाले हैं। सेवानिवृत्ति से ठीक पहले इस प्रकार के आरोपों का सामने आना कई सवाल खड़े करता है। विभागीय जानकार इसे एक सोची-समझी रणनीति एवं दबाव बनाने का प्रयास मान रहे हैं।

हालाँकि शिकायत उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की गई है और जांच उन्हीं के स्तर पर की जाएगी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा यह स्पष्ट होगा कि आरोप तथ्यात्मक हैं या किसी अधिकारी को बदनाम करने की साजिश।

आरोपों और तथ्यों के बीच विसंगति

मुख्य अभियंता एवं तकनीकी सहायक के बीच किसी भी प्रकार का पारिवारिक या रक्त संबंध नहीं है; केवल उपनाम (सरनेम) में समानता है। जानकारों के अनुसार, संयंत्र में केवल एक नहीं बल्कि विभिन्न तकनीकी सहायकों (TA) एवं इंजीनियरों की एक पूरी टीम मिलकर सिस्टम सुधारने का कार्य कर रही है। ऐसे में रिश्तेदारी के आरोप लगाकर अधिकारियों की काबिलियत एवं सामूहिक मेहनत पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं माना जा रहा।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का यह भी कहना है कि जिन व्यक्तियों द्वारा इन आरोपों को सोशल मीडिया पर उछाला गया है, वे पूर्व में भी बार-बार इस प्रकार की शिकायतें करते रहे हैं, जिनका उद्देश्य कथित रूप से दबाव बनाना, ब्लैकमेल करना तथा बाद में समझौते के बाद शिकायत वापस लेना रहा है।

यदि जांच के बाद ये आरोप असत्य सिद्ध होते हैं, तो यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकार की घटनाएँ और तत्व लोकतंत्र का दुरुपयोग करते हुए न केवल व्यक्तियों को बदनाम करने का प्रयास करते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं को भी कमजोर करने की भूमिका निभाते हैं।।