आदि गुरु शंकराचार्य जन्मोत्सव पर स्मरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये

✒️ संजय तिवारी चंद्रपूर (Chandrapur जिल्हा प्रतिनिधी)

चंद्रपूर(दि.13 मे) :- 

            हिंदी ब्राह्मण समाज बहुउद्देशीय संस्था द्वारा आयोजित दुर्गा माता मंदिर संजय नगर मुल रोड चंद्रपूर मे आदि गुरु शंकराचार्य का स्मरण किया गया और उन्हे श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये! कार्यक्रम का संचालन.पं.धीरेंद्र कुमार मिश्रा ने करते हुए कहा की सनातन धर्म को तत्त्वमीमांसा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करने वाले महापुरुष महान दार्शनिक एवं प्रवर्तक धर्म प्रवर्तक अद्वैत वेदांत को ठोस आधार प्रदानकर भारतीय दर्शन को अमृत प्रदान किया! सभी ने आदी गुरु शंकराचार्य जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण पुष्पांजली अर्पित कर कार्यक्रम को सुरू किया! 

       संगोष्टी मे बोलते हुए मुख्य वक्ता धर्म जागरण समन्वय न्यास के विदर्भ प्रांत प्रशासकीय अधिकारी श्री सुहास दाणी जी व हिंदी ब्राह्मण समाज के मुख्य मार्गदर्शक पंडित मथुरा प्रसाद पांडे जी ने कहा कि आदि गुरु शंकरचार्य शंकर भगवान के साक्षात अवतार थे आदि गुरु शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के प्रतिष्ठाता तथा संन्यासी संप्रदाय के गुरु ,सत्यदृष्टा ऋषी थे! उनकी प्रतिभा अलौकिक थी और साधना अद्वितीय! अपनी भास्कर चेतना तथा ब्रह्मज्ञान के फलस्वरूप उन्होने वैदिक सनातन हिंदू धर्म को ना केवल विघटित होने से बचा लिया अपितु अनेक आवश्यक रचनात्मक सुधार कर उसे पुष्ट नील पर पुनर्स्थापित किया ! उन्होने कहा आदि गुरु शंकराचार्य ने जगत को मिथ्या समझते हुए भी उसकी व्यावहारीक ने वेदान्त को व्यवहारिक धर्म बना दिया! आज भारत में वैदिक धर्म की प्रतिष्ठा, वेदो के प्रति श्रद्धा, ब्रह्मज्ञान के प्रति आदर, अनन्य भक्ती, त्याग, तपस्या, लोकसंग्रह की भावना, जो कुछ भी दिखाई देता है उसका श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य को ही है ! आचार्य उच्च कोटी के प्रौढ दार्शनिक थे ! आज 1200 साल के बाद आधी गुरु शंकराचार्य का 32 वर्ष अलौकिक जीवन साक्षात रुपेण अबाधित सत्य का मूर्त प्रकाश हैं! आचार्य शंकराचार्य के जीवन का आज हमें नये रूप मे स्मरण करना होगा और उनके जीवन में अनेक द्वंदो को आत्मज्ञान मे समान्वित करने की प्रेरणा तथा उसका उपाय आचार्य गुरु शंकराचार्य के जीवन और उनकी वाणी से संग्रह करना होगा ! 

           वैशाख शुक्ल पंचमी को आज प्रातः श्री बद्रीनाथ के कपाट खूल गये है ! आज ही की तिथी को आदि शंकराचार्य का आविर्भाव भी हुआ! उनका पार्थिव शरीर महाप्रस्थान के बाद नही मिला था, वह केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मे ही विलीन हो गया था ! आदि गुरु शंकराचार्य के श्री चरणो मे प्रणाम बारम्बार प्रणाम !

         आदिगुरू शंकराचार्य जन्मोत्सव पर संगोष्टी मे मुख्य रूप से हिंदी ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष पं. विनोद कुमार तिवारी,डॉक्टर शैलेंद्र कुमार शुक्ला प़.धेरेन्द्र कुमार मिश्रा ,पं. कृपाशंकर उपाध्याय,पं. सुरेंद्र तिवारी ,पं. रजनीश त्रिपाठी,पं.शीतला प्रसाद मिश्रा,पं. अशोक मिश्रा,पं. अशोक शर्मा,पं. आलोक त्रिपाठी, पं. जयप्रकाश द्विवेदी,पं. उमाशंकर पांडे,पं.ओम प्रकाश पाठक,पं.जगदीश तिवारी,पं.अनंत तिवारी,पं.श्रीप्रकाश पांडे ,पं. राजा मिश्रा,पं. स्वप्निल तिवारी,पं. विष्णू तिवारी,पं. प्रकाश उपाध्याय,पं. पप्पू मिश्रा,पं. श्यामलाल पांडे, पं. राकेश तिवारी, श्री सुदामा यादव,पं.मनीष पांडे, पं.राहुल पांडे.श्री गोकुल यादव, कु. गोल्डी यादव, पं.शशी भूषण पांडे, श्री कळसकर ,पं.मनीष पांडे खूटाळा,

पं. लल्ला पांडे खूटाळा, पं.सुनील मिश्रा,समेत अन्य समाज के विप्र बंधूओ ने सहयोग किया!